Dadi aur maa ke sath sex kahani 

Dadi aur maa ke sath sex kahani …

Dadi aur maa sex kahani – Jab main apni sagi bahan ki chudai kar raha tha. Tab bahen ka seal todne me dadi aur maa ne help ki. Dadi aur mummy ki wajah se bahan ki chut ko marne me koi problem nahi huyi hai. In dono ki wajah se sex karne karne me madad mili hai. Kyoki sex ka experience in logo ke pas already hai. Dadi aur maa ne apna anubhav ( experience ) share karke achhi tarike se bhai bahen sex ko enjoy kar sak, Sex ko maje aur ek – dusre ko santust ( satisfied ) karke karana chahiye. Iski wajah se both person sex ko joy karte hai…                        Dadi aur maa chudai kahani

 

घर पर में मेरी माँ उनकी उम्र 30 साल मेरी छोटी बहन और मेरी दादी जिसकी उम्र 55 साल. फिर मैंने उस समय अपना स्कूल छोड़ दिया और में भी अपनी माँ के साथ काम करने लगा अपनी छोटी बहन को पढ़ता रहा. में और माँ सुबह उठकर दूध धोहती और उसके बाद हम खेत में काम करने चले जाते. ऐसे ही कब 9 महीने निकल गये मुझे इस बात का पता भी नहीं चला और अब में उम्र बढ़ने के साथ साथ थोड़ा सा सयाना भी हो गया था. मेरी माँ का शरीर भरा हुआ था और उनके बूब्स बड़े बड़े और थोड़ी सी मोटी गांड वो हमेशा साड़ी पहनती थी. वो गर्मियों के दिन थे हम सुबह उठे और दूध निकालने की तैयारी करने लगे. मैंने देखा कि उस समय माँ ने सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज ही पहना हुआ था. उसके अंदर ब्रा नहीं पहनी थी जिससे माँ के बूब्स के निप्पल साफ नजर आ रहे थे.

अब हम काम करने लगे. माँ उस समय अपने पकड़ो को लेकर बिल्कुल बेफिक्र थी, वो यह सोचती थी कि में अभी छोटा हूँ और हमारे घर पर सिर्फ़ में ही एक मर्द था.

अब ऐसा तो हर दिन होने लगा. एक दिन हम सुबह काम खत्म करके खेत में काम करने चले गये. वहां भी हमने काम किया और दोपहर के समय माँ मुझसे बोली कि चल बहुत हुआ अब थोड़ा सा आराम करते है, यह बात सुनकर में मुहं हाथ धोकर बैठ गया, लेकिन मेरी माँ वहीं पर नहाने लगी और उन्होंने मुझे भी आवाज़ देकर कहा कि में भी नहा लूँ.         Dadi aur maa chudai kahani

में भी यह बात सुनकर वहां पर चला गया और तब मैंने देखा कि उन्होंने सिर्फ़ अपने बदन पर साड़ी लपेट रखी थी, जो गीली होने की वजह से जिस्म से चिपक चुकी थी और उनके बूब्स मुझे साफ साफ नजर आ रहे थे, लेकिन मैंने कोई ध्यान नहीं दिया और उन्होंने मुझे अपने पास बुला लिया और फिर मेरे सारे कपड़े उतार दिए जिसकी वजह से में उनके सामने बिल्कुल नंगा खड़ा हुआ था. मेरा लंड करीब पांच इंच का था जो अभी लटका हुआ था.

वो मुझे अब नहलाने लगी और नहलाते हुए उनकी साड़ी नीचे उतर गयी, जिससे उनके बूब्स नंगे हो गये और मुझे नहलाते समय गलती से उनका एक हाथ बार बार मेरे लंड पर लग रहा था, जिसकी वजह से कुछ देर बाद मेरा लंड अब खड़ा होना शुरू हो गया और थोड़ी ही देर में मेरा पूरा लंड तनकर खड़ा हो गया और वो बड़े गोर से मेरा लंड देखने लगी. कुछ देर बाद उन्होंने मुझे नहलाकर भेज दिया और वो खुद भी नहाकर जल्दी ही वापस आ गई.

उसके बाद हम दोनों ने साथ में बैठकर खाना खाया और अब वो बोली कि में सो रही हूँ. तो मैंने उनको बोला कि आप सो जाए में बाहर बैठा हुआ हूँ, दोस्तों हमने हमारे खेत में एक छोटा सा कमरा बनाया हुआ है. तो में बाहर आकर बैठ गया और थोड़ी देर बाद कमरे से मुझे एक आवाज आने लगी. फिर मैंने अंदर जाकर देखा तो एकदम चकित हो गया, क्योंकि मेरी माँ का एक हाथ अपने पेटीकोट में और अपने दूसरे हाथ से वो अपने बूब्स दबा रही थी. फिर मेरे देखते ही देखते करीब पाँच मिनट में वो शांत भी हो गयी और उसके बाद सो गयी.

दोस्तों अब ऐसा हर दिन होने लगा, एक दिन खेत पर काम ज्यादा था और गर्मी भी ज्यादा थी वो मुझसे बोली कि चल खाना खाते है. फिर मैंने उनको बोला कि आप खा लो, में कुछ देर के खा लूँगा, उन्होंने जाकर मुहं हाथ धोकर खाना खा लिया और मेरे लिए रख दिया.

उसके बाद वो भी काम पर वापस आ गई. फिर करीब आधे धंटे के बाद में मुहं हाथ धोकर खाना खाने चला गया. मैंने कमरे में देखा, लेकिन खाना नहीं था तो मैंने उनसे पूछा कि खाना कहाँ है? तो वो बोली कि कमरे में है उसके बाद वो अंदर आ गई और देखकर बोली कि कोई जानवर ले गया होगा. में तुझे घर से खाना लाकर देती हूँ. फिर मैंने मना किया बोला रहने दो इतनी दूर जाना, कोई बात नहीं और उसके बाद में दोबारा से काम करने लगा और अब करीब दोपहर के दो बज चुके थे इसलिए मुझे तेज भूख भी लगने लगी.

अब वो बोली कि चल थोड़ा आराम करते है हम नहा धोकर बैठ गये और अब मुझे पेट में दर्द होने लगा यह बात मैंने माँ से कहा, वो बोली कि भूख की वजह से हो रहा होगा. फिर उसी समय वो मुझसे पूछने लगी क्या तू दूध पियेगा? मैंने उनसे पूछा कि कहाँ है दूध? उसी समय उन्होंने अपने एक बूब्स पर हाथ रखकर वो बोली चल आ जा. अब में उनके पास चला गया उन्होंने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया और अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी.

कुछ देर में सारे बटन खुल गये और उनके दोनों बूब्स नंगे होकर मेरे मुहं पर आ गये. अब उन्होंने अपने एक निप्पल को पकड़कर मेरे मुहं में दे दिया, जिसको में चूसने लगा, जिससे रस निकलने लगा. में ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा जिससे उनके मुहं से सिसकियों की आवाज़ निकलने लगी और में अपने दूसरे हाथ से दूसरे बूब्स को मसलने लगा. फिर कुछ देर बाद वो बोली कि तू अब लेट जा और में लेट गया. साइड में आकर बूब्स को मुहं में लेकर चूसने लगा, कुछ देर बाद उन्होंने अपना एक हाथ अपने पेटीकोट में डाल दिया और कुछ देर बाद मैंने भी अपना एक हाथ उनके पेटीकोट में डाल दिया.

अब वो मेरी तरफ देखने लगी उसी समय मैंने निप्पल पर दाँत गड़ा दिए जिसकी वजह से उनके मुहं से आईईई ऊईईई की आवाज निकल गयी. उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसके बाद अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और मुझसे बोली कि चल बेटा अब तू चाट मेरी चूत को. फिर में भी उनके कहते ही चूत को चाटने लगा, जिसकी वजह से उनके मुहं से सिसकियों की आवाज निकल रही थी. वो बहुत गरम हो चुकी थी और मेरा भी लंड एकदम सख्त हो चुका था.

कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे लेटने के लिए कहा और में लेट गया. उसके बाद वो मेरे ऊपर आकर अब मेरे लंड पर अपनी चूत को रखकर धीरे धीरे नीचे बैठने लगी. फिर थोड़ी देर बाद मेरा लंड उनकी चूत में पूरा चला गया और उसके बाद वो ऊपर नीचे होने लगी, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और में उनके दोनों बूब्स को मसलने लगा. उन्होंने कुछ देर बाद अपनी स्पीड को बढ़ा दिया और वो झड़ गयी. फिर उसके बाद वो मेरे लंड से उठी और मेरा लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी.

उसके बाद उन्होंने अपनी चूत को मेरे मुहं पर रख दिया और में उनकी चूत को चाटने लगा. उनकी चूत का पानी बहुत स्वादिष्ट था. वो एकदम चित होकर अपने दोनों पैरों को खोलकर लेट गयी और बोली कि आजा मेरे बेटे, चोद तू मुझे, फाड़ दे तू मेरी चूत को, वाह मज़ा आ रहा है, चूसता जा ऐसे ही उसी समय में उनके पैरों के बीच में जाकर बैठ गया और मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर रखा और धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड फिसलकर नीचे चला गया और उन्होंने मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के मुहं पर रखकर वो बोली हाँ अब मार धक्का, मैंने एक ज़ोर से धक्का मारा और मेरा पूरा लंड चूत में चला गया. फिर उसके बाद में चोदने लगा और वो भी नीचे से अपनी गांड को उठाकर मेरा साथ दे रही थी.

कुछ देर बाद मैंने अपने धक्को की स्पीड को बढ़ा दिया और में बूब्स को भी दबाने लगा. फिर करीब 15 मिनट के बाद वो दोबारा झड़ गयी और मैंने उनकी चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया. उसके बाद वो उठी और घोड़ी बन गई और में पीछे से जाकर उनकी चूत पर अपने लंड को रखकर धक्के मारकर चोदने लगा. वो बहुत खुश हो रही थी. फिर मैंने करीब तीस मिनट उनको अलग अलग तरह से चोदा तब तक वो चार बार झड़ चुकी और फिर मुझे ऐसा लगा कि मेरे लंड से कुछ बाहर निकलने वाला है तो यह बात मैंने उनको बताई.

फिर मुझसे बोली तू मेरे मुहं में अपना लंड दे दे और मैंने तुरंत ही लंड को चूत से बाहर निकालकर उनके मुहं मे दे दिया और वो उसको चूसने लगी. उस समय मेरे लंड से एक पिचकारी निकली जो उनके मुहं में निकली और वो सारा रस पी गयी. फिर वो बोली कि आज बहुत मज़ा आया और वो बहुत खुश हुई. हम दोनों वैसे ही पड़े रहे और थोड़ी देर बाद वो उठने लगी, लेकिन मैंने उनको पकड़ लिया और बोला कि एक बार फिर से करे.

वो बोली कि आज रात को घर पर दोबारा बड़े आराम से करेंगे, मैंने खुश होकर कहा कि हाँ ठीक है और हमने कपड़े पहने उसके बाद काम करने लगे. शाम को हम घर चले गये. में अब इंतजार कर रहा था कि कब रात हो और में फिर से चुदाई करूं? रात को खाना खाने के बाद मेरी दादी माँ से बोली कि आज तू मेरे कमरे में सो जाना, माँ ने उनसे पूछा क्यों क्या हुआ? उन्होंने जवाब दिया कि बस वैसे ही उसी बीच में बोल पड़ा में भी आपके पास ही सोऊंगा. फिर दादी बोली नहीं तू अपने कमरे में सोना.

फिर माँ ने अपना सारा काम ख़त्म किया और उसके बाद वो सोने चली गयी, लेकिन मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी. मुझे तो बस माँ की चूत और बूब्स दिख रहे थे और मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया. फिर कुछ देर बाद में उठा और दादी के कमरे में जाने लगा तो मुझे दादी के कमरे से कुछ आवाज़ आ रही थी इसलिए मैंने खिड़की से अंदर झांककर देखा. मेरी दादी ने साड़ी नहीं पहनी और उनके ब्लाउज के बटन भी खुले हुए थे और पेटीकोट को ऊपर किया हुआ था और मेरी माँ, दादी की जाँघो की मालिश कर रही थी.

दादी ने अपने पेटीकोट को और ऊपर किया जिसकी वजह से दादी की झांटो से भरी चूत साफ दिख रही थी. फिर कुछ देर बाद दादी ने अपना ब्लाउज उतार दिया और अब दोनों बूब्स ढीले नंगे थे. फिर माँ ने अपना एक हाथ दादी की चूत पर रख दिया, दादी के मुहं से सिसकी निकल गयी और माँ ने दादी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और पेटीकोट को उतार दिया, जिसकी वजह से अब दादी पूरी नंगी लेटी हुई थी. अब माँ ने दादी के बूब्स पर तेल डाला और मालिश करने लगी. फिर थोड़ी देर दादी के बूब्स की मालिश करने के बाद उन्होंने अपनी साड़ी को भी उतार दिया और ब्लाउज, पेटीकोट को भी उतार दिया. अब वो दोनों पूरी नंगी थी. माँ दादी के पेट पर तेल डालकर मालिश करने लगी. फिर उसके बाद चूत पर पूरे शरीर की मालिश की और उसके बाद दादी ने भी उनकी मालिश की उसके बाद दादी ने अपना मुहं मेरी माँ की चूत पर रख दिया और चूत को चाटने लगी.

फिर माँ अपने बूब्स खुद ही मसलने लगी और कुछ देर बाद दादी ने अपनी चूत को मेरी माँ के मुहं पर रख दिया. अब मेरी माँ मेरी दादी की चूत को चाटने लगी वो दोनों 69 की पोजीशन में हो गई, लेकिन मेरा बाहर खड़े बड़ा बुरा हाल हो रहा था और मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो में सीधा दादी के कमरे में चला गया. मुझे देखकर दादी डर गयी और उन्होंने झट से पास पड़ी साड़ी को अपने और माँ के बदन पर डाल लिया. अब दादी ने मुझसे पूछा कि तू यहाँ क्या कर रहा है?

मैंने कहा कि मुझे नींद नहीं आ रही थी इसलिए मैंने सोचा में माँ के पास सो जाता हूँ, लेकिन आप तो दोनों यहाँ मज़े कर रहे हो, यह देख मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया. यह बात कहकर उसी समय मैंने अपनी लूँगी को खोल दिया और दादी मेरे नंगे लंड को बड़े ध्यान से देखने लगी. फिर में दादी के पास गया और उन दोनों के बीच में नंगा लेट गया मैंने अपना एक हाथ माँ की चूत पर और एक हाथ दादी की चूत पर रख दिया.

फिर दादी ने मेरा हाथ अपनी चूत से हटा दिया. मैंने अपने एक हाथ से दादी के बूब्स को पकड़ लिया और उसके बाद मैंने दादी की चूत में अपनी एक उंगली को डाल दिया, जिसकी वजह से दादी सिसकने लगी. फिर दादी ने मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया और में दादी पर चड़ गया.

फिर मैंने दादी के पैरों को खोला और उनकी चूत पर अपना लंड रखा और धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड उनकी चूत में चला गया. में उनको पूरी स्पीड से धक्के देकर चोदने लगा और मेरी माँ उनके बूब्स को मसलने लगी करीब बीस मिनट बाद हम दोनों एक साथ झड़ गये. में उनके ऊपर ही लेट गया और थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकाला तो वो अभी भी खड़ा था. फिर माँ ने मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और वो चूसने लगी. फिर मैंने कुछ देर बाद माँ को घोड़ी बनाया और पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया और उनको चोदने लगा और वो दादी की चूत को चाटने लगी.

दोस्तों इस बार में लगातार तीस मिनट तक उनको चोदता रहा. फिर उसके बाद मैंने अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकालकर दादी के मुहं में दे दिया और उसके बाद में चित होकर लेट गया. अब तुरंत ही दादी मेरे ऊपर आ गयी और वो मेरे लंड पर अपनी चूत को रखकर बैठ गयी. मेरा पूरा लंड दादी की चूत में चला गया.

फिर वो ऊपर नीचे होने लगी और माँ ने अपनी चूत को मेरे मुहं पर रख दिया. में चूत को चाटने लगा, दादी और माँ दोनों एक दूसरे के बूब्स दबा रही थी. कुछ देर बाद दादी झड़ गयी वो मेरे लंड से उठी तो माँ बैठ गयी, ऐसे ही एक घंटे तक मैंने उन दोनों की चुदाई के मज़े लिए और फिर में माँ के बूब्स पर झड़ गया. फिर हम तीनों सो गये. फिर करीब तीन बजे मेरी आँख खुली तो मैंने देखा माँ एक तरफ नंगी सो रही थी और दादी एक तरफ, लेकिन दादी उल्टी होकर अपनी गांड को ऊँची करके लेटी हुई थी. यह सब देखकर मेरा लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया. मैंने सोचा कि अब दादी की गांड भी मारते है. फिर में उनके पास गया और दादी की गांड पर अपना लंड रखकर एक ज़ोर से धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड दादी की गांड में चला गया, जिसकी वजह से दादी चीख पड़ी.

अब माँ भी दादी की चीख सुनकर उठ गयी और वो मेरा लंड दादी की गांड में देखकर हंस पड़ी और मेरे पास आई और मुझसे बोली कि गांड आराम से मारते है, अब रुक जा हिलना नहीं. फिर कुछ देर में दादी का दर्द कम हुआ तो माँ बोली कि चल अब मार धक्के, लेकिन आराम से मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए. फिर कुछ देर बाद दादी भी मेरा साथ देने लगी, में दस मिनट में झड़ गया और मैंने गांड से अपना लंड बाहर निकाला और मेरी माँ, दादी की गांड को चाटने लगी.       Dadi aur maa chudai kahani

फिर हम सभी सो गए. मैंने दूसरे दिन सुबह दूध निकालते हुए माँ को वहीं चोद दिया और उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया. सुबह का काम खत्म करने के बाद हम नाश्ता करने के लिए बैठे, तो दादी बोली कि बहू जो रात में हुआ वो ठीक नहीं है अभी वो छोटा है, तो माँ बोली कि आपने ही तो उसका लंड पकड़ा था. दादी बोली कि अब जो हो गया सो हो गया, लेकिन आगे नहीं. फिर माँ बोली कि हाँ ठीक है और में उनकी वो बातें सुनकर एकदम उदास हो गया कि अब मुझे चूत नहीं मिलेगी. फिर उसके बाद हम दोनों खेत गये, में माँ को किस करने लगा तभी वो बोली कि अब नहीं बेटा, दादी की बात मान ले खुश रहेगा.

फिर में बोला कि हाँ ठीक है तो वो बोली कि तू नाराज मत हो, में तेरा पानी निकाल दिया करूँगी और जब तेरी मर्ज़ी तो तू मेरे और दादी के बूब्स से खेल लेना. फिर मैंने खुश होकर कहा कि हाँ ठीक है उसके बाद हम काम करने लगे. हम शाम को घर वापस आए दादी ने मुझे लाकर दूध दिया और फिर रात को सोने से पहले मेरी माँ और दादी ने पूरी नंगी होकर मेरे लंड पर तेल डालकर मालिश करने लगी. माँ मेरे लंड की और दादी मेरे आंड की मालिश करने लगी उसके बाद दादी ने अपने बूब्स पर तेल लगाया और मेरे लंड पर वो अपने बूब्स को रगड़ने लगी तभी माँ ने भी अपने बूब्स पर तेल लगाकर मेरा लंड अपने बूब्स के बीच दबाकर रगड़ने लगी, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ गया. फिर करीब एक घंटे की मालिश के बाद मेरे लंड से ढेर सारा वीर्य बाहर निकाला, जिसको उन दोनों ने पी लिया. ऐसा अब हर दिन होने लगा, लेकिन मुझे चूत की याद बहुत आती थी.

धन्यवाद …

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