Meri Pahali Chodai Kahani – पहली बार की यादगार चुदाई

Meri Pahali Chodai Kahani free…

1st time sex, पहली बार चुदाई का अनुभव…

अभी कुछ टाइम पहले मेरे इम्तिहान चल रहे थे तो जब मेरा पेपर ख़त्म हुआ मैं टाइम से पहले ही क्लास में से बाहर आ गया।

जब मैं पार्किंग में आ रहा था, तो मुझे वहाँ एक आंटी मिलीं।

मैंने उनसे पूछा- आप भी सीए कर रहीं हो क्या?

उन्होंने कहा- हाँ !

तो इस तरह हमारी बातें चालू हुईं। बाद में पता चला कि उन्हें एक सब्जेक्ट के नोट्स की ज़रूरत थी। वो नोट्स मेरे पास रखे हुए थे।

मैंने कहा- जब कल मैं इम्तिहान देने आऊँगा तो ले आऊँगा।

उन्होंने मुझसे मेरा फोन नंबर लिया और अपना भी दिया।

जब हम अगले दिन मिले तो मैंने कहा- आपके पास समय हो तो क्या हम पास में कॉफी पीने चलें?

उन्होंने हाँ कर दी।

हम दोनों वहाँ अपनी-अपनी गाड़ी से गये, जाते वक़्त मैंने उनसे पूछा- अब कब मिलना होगा?

तो उन्होंने बोला- रविवार को अगर तुम फ्री हो तो घर आ जाना।

मैंने कहा- रविवार को तो नहीं पर मैं सोमवार को आ जाऊँगा।

फिर हम अपने घर चले गये। सोमवार को मॉर्निंग में उनका मैसेज आया ‘गुड मॉर्निंग’

मैंने उन्हें फोन किया और हलचाल पूछे, तो उन्होंने कहा- तुम आ रहे हो क्या?

मैंने कहा- चलो, मैं अभी आधे घण्टे में आता हूँ।

मैं दिन में 2 बज़े के आस-पास उनके घर पहुँच गया। मैंने डोरबेल बजाई। मुझे लग रहा था पता नहीं कौन दरवाजा खोलेगा? लेकिन मेरी किस्मत थी कि उन्होंने ही दरवाजा खोला।

वो काले रंग की साड़ी पहने हुई थीं, बहुत अच्छी लग रही थीं। उन्होंने मुझे अंदर बुलाया, फिर वो मेरे लिए कॉफी बनाने चलीं गईं। फिर बाद में हमारी बातें शुरू हुईं, तो मैंने उनसे मज़ाक में पूछ लिया कि आपका शादी के पहले कोई प्रेमी था क्या?

उनका जवाब आया- हाँ !

मैंने पूछा- फिर आपने उससे शादी क्यों नहीं की?

तो बोली- यार राहुल, जाने दो जो गया वो गया।

फिर उन्होंने पूछा- तुम्हारी कोई है क्या?

मैंने कहा- नहीं कोई नहीं है। कोई पटती ही नहीं।
तो उन्होंने मुझे अलग ही तरह से देखा और कहा- कभी कोशिश की हो तो बात बनेगी ना !!

मैंने भी हँस कर ‘हाँ’ में जवाब दे दिया।

फिर अचानक ही वो मुझे अजीब तरीके से देखने लगी और कहा- राहुल पता है, शादी के पहले जो मेरा प्रेमी था, वो तुम्हारे जैसा ही दिखता था, बातें भी तुम्हारे जैसे ही करता था।

मैंने कहा- तो क्या हुआ? मुझे ही अपना बॉय-फ्रेंड बना लो।

वो हँस पड़ीं और कहा- पागल, मेरी अब शादी हो चुकी है।

मैंने कहा- मुझे तो कोई परेशानी नहीं है।

उन्होंने कहा- चलो, सोच कर जवाब देती हूँ।          Meri Pahali Chodai Kahani free

फिर वो मुझे अपने फैमिली के बारे में बताने लगीं। उन्होंने कुछ ऐसी भी बातें बताईं जो उनके और उनके पति की निजी बातें थीं। उन्होंने बताया कि उनके पति उन्हें प्यार नहीं करते हैं, जब भी मैं उनका साथ माँगते हैं, तो चिढ़ जाते हैं। उनकी आँखों में आँसू आने लगे।

मैंने कहा- प्लीज़, आप रोना बंद नहीं करोगी तो मैं चला जाऊँगा।

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तो फिर वो चुप हुईं। फिर अचानक उन्होंने मुझे गाल पर किस कर दिया, मैं हैरान था और फिर उन्होंने मुझे ‘आई लव यू’ बोला, तो मैं फिर हैरान था।

उन्होंने कहा- राहुल क्या तुम मुझे अपने कंपनी दोगे?

मैंने ‘हाँ’ कर दिया और उन्होंने मुझे गले से लगा लिया। मैंने भी उन्हें अपने गले से चिपका लिया।

तभी मैं उन्हें उनके होंठों पर चूमने लगा और उन्होंने भी मना नहीं किया, उल्टा वो भी मेरा साथ देने लगीं।

फिर उन्होंने कहा- राहुल प्लीज़ मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए !
मैंने उनको अपनी गोद में उठा लिया और उन्हें बेड पर लेटा दिया। मैं उनके पूरे शरीर पर चुम्बन कर रहा था। फिर मैं उनके अंगों पर चूमता-चूमता उनके पेट पर भी आ गया और धीरे-धीरे मैंने उनकी टाँगों पर अपने अधरों को फेरना शुरू किया।

मैंने उनको चूमने के साथ-साथ उनकी साड़ी और बाकी के कपड़े भी हटाता जा रहा था। और जब उनके शरीर पर सिर्फ पैन्टी बची तो एक बार फिर मैंने उनके होंठों को छेड़ना शुरू किया था पर वो बहुत गर्म हो चुकी थीं।

मुझसे बोलीं- राहुल प्लीज़ वहीं करो न ! अच्छा लग रहा था।

मैंने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और उनके ऊपर छा गया। अब मैं उनके चूचों को अपने हाथों से मसल रहा था, उनकी चूत ने रस छोड़ना शुरू कर दिया था।

वो वास्तव में बहुत प्यासी थीं। फिर मैं अपनी जीभ उनके मम्मों पर और उनके निपल्लों पर घुमाने लगा तो उनके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। उन्हें काफ़ी मज़ा आ रहा था।

उन्होंने अचानक ही मेरे कान पर काटा तो मैं हल्का सा चिल्लाया तो वो हँसने लगीं। मुझे और उनको सब कुछ बहुत अच्छा लग रहा था। हमें इस तरह ही एक दूसरे को प्यार करते करते दो घंटे हो गये थे। उसमें हम दोनों ही अपना प्री-कम छोड़ चुके थे। हमें अब चुदाई की जल्दी होने लगी थी।

उन्होंने कहा- अल्मारी में कपड़ों के पीछे एक कॉन्डोम का पैकेट रखा है, उसे निकाल लाओ।

जब मैं जाने लगा तो पता नहीं क्या हुआ, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और कहा- रहने दो कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।

मैंने उनकी आँखों में देखा और इशारे से पूछा कि क्या वास्तव में उनको कोई दिक्कत नहीं होगी। तो वो इशारे में हाँ बोलीं, मुझे बेड पर खींच लिया। हम फ़िर चालू हो गये, मैं उनके ऊपर आ गया। उन्होंने अपने हाथ से मेरे लण्ड को पकड़ा और अपनी चूत पर लगाने लगीं।

मैंने उनका हाथ हटा दिया और अपना सुपारा उनकी चूत की दरार में फँसा दिया। उनकी चूत से रस का लिसलिसापन एक चिकनाई का अच्छा काम कर रहा था। मेरा लौड़ा उनकी चूत में घुसने को तैयार था। मैंने उनकी आँखों में झाँका और उनकी तड़फ देख कर एक करारा झटका लगाया। मेरा मूसल उनकी ओखली में घुस गया था।

उनके कंठ से एक चीख निकली- आह… ह… ह… ह… बड़े जालिम हो… ओ… ओ… तुम… म… म !

पर मैंने उनकी सिसकारी को अपने लिए शाबाशी समझा और दनादन चोटें मारता चला गया और बीस मिनट की धुआंधार चुदाई के बाद मैंने अपना माल उनकी चूत में छोड़ दिया।

कुछ देर हम यूँ ही पड़े रहे, करीब आधा घण्टे बाद हमने एक बार और सैक्स किया।

वो मुझसे बोली- राहुल, तुम मुझे बहुत पसंद हो लेकिन पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लग रहा है कि मैंने तुम्हारे साथ सैक्स करके ठीक नहीं किया।

फिर हमने तय किया कि अब हम नहीं मिलेंगे और उसके बाद अभी तक मैं उनसे नहीं मिला हूँ। बस कभी उनसे फोन पर बात हो जाती है !

आपको मेरी कहानी कैसी लगी। प्लीज़ जरूर बताना।                                Meri Pahali Chodai Kahani free

The End…


Galti Se Pahali Chudai

मेरा एक दोस्त था, उसकी उम्र करीब 22 साल थी. उसकी माँ जिसका नाम बबली है, करीब 42 साल की है, वो बहुत सेक्सी लगती थी और वो दिखने में अभी भी 30-32 साल की लगती थी, वो करीब 5 फुट 6 इंच, एकदम स्लिम, वजन करीब 55 किलोग्राम है और उसका फिगर 36-30-38 था. में जब भी उनके घर पर जाता था तो में उसको देखकर मदहोश हो जाता था. में जब भी बिपाशा बसु की कोई मूवी देखता था तो मुझे उसका चेहरा याद आ जाता है, मेरा उनके घर पर बहुत आना जाना था.

एक दिन में, आंटी और करण एक साथ एक शादी में गये थे और यह शादी उनकी रिश्तेदारी में थी. अब रात को आंटी के सिर में दर्द होने लगा था, तो आंटी ने करण को घर छोड़ने को कहा, वो अभी व्यस्त था. मैंने भी करण से कहा कि में घर जा रहा हूँ और मुझे सुबह आउट ऑफ स्टेशन जाना था. आंटी बोली कि बेटा मुझे घर पर छोड़ देना. मेरा घर दूर था, तो करण बोला कि तुम मेरे घर पर सो जाना और सुबह में तुझको स्टेशन पर छोड़ आऊंगा, मैंने कहा कि ठीक है. अब में बाइक पर आंटी के साथ वापस आ रहा था. आंटी ने उस वक्त पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई थी और वो बहुत खूबसूरत लग रही थी. अब जब में किसी स्पीड ब्रेकर पर ब्रेक लगाता, तो आंटी के बूब्स मेरी पीठ से लग रहे थे. अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और अब मेरा लंड भी धीरे-धीरे खड़ा होने लगा था. रास्ते में बारिश शुरू हो गयी और तेज हवा भी चलने लगी.

अब आंटी ने अपना एक हाथ मेरी कमर पर रखा हुआ था, तो तभी अचानक से मेरी बाइक के आगे एक कुत्ता आ गया तो मैंने एकदम से ब्रेक लगाई. आंटी का हाथ मेरी कमर से स्लिप होकर मेरी जाँघ पर आ गया और उनका हाथ मेरे खड़े लंड पर टच हुआ और उसके बाद वो मुझसे चिपककर बैठ गयी. हम लोग करीब 12 बजे घर आ गये और अब हम पूरी तरह से भीग गये थे. अब मुझे आंटी के ब्लाउज के अंदर से उनके बूब्स साफ-साफ नजर आ रहे थे. आंटी ने मुझे करण का पजामा दिया और कहा कि तुम अपने कपड़े चेंज कर लो, तुम काफ़ी भीग गये हो. में करण के रूम में जाकर अपने कपड़े चेंज करने लगा और आंटी ने टी.वी ऑन कर लिया और वो टी.वी देखने लगी.

अब मुझको अंदर लगे हुए कांच में से टी.वी साफ नजर आ रही थी. उस दिन शनिवार था और रात को टी.वी पर सेक्सी मूवी आती थी. अब जब आंटी टी.वी चैनल सर्च कर रही थी तो टीवी पर सेक्सी मूवी का चैनल आ गया, तो आंटी वो मूवी देखने लगी. अब मुझे अंदर से सब नजर आ रहा था. में करण की बनियान और पजामा पहनकर बाहर आ गया, तो आंटी ने मुझे देखकर एकदम से चैनल चेंज कर दिया और वो चेंज करने अंदर रूम में चली गयी.

मैंने जानबूझ कर वही मूवी लगा ली, क्योंकि वो अंदर रूम में कांच में साफ नजर आ रही थी. आंटी ने मुझे आवाज़ मारी और कहा कि जरा टावल देना में बाहर भूल गयी हूँ. मैं जैसे ही आंटी को टावल देने अंदर गया, तो वो एकदम नंगी खड़ी थी. अब में उनको नंगी देखकर घबरा गया था. वो मुस्कुराई और मेरे हाथ से टावल ले लिया. में बाहर आकर सोफे पर बैठ गया और टी.वी देखने लगा.

आंटी कुछ देर के बाद मेरे पीछे आकर खड़ी हो गयी, लेकिन मुझे कुछ पता नहीं चला. जब उन्होंने मुझसे कहा कि राजन कॉफ़ी लोगे? तो में एकदम से घबरा गया और टी.वी का चैनल चेंज किया और कहा कि नहीं आंटी. वो बोली कि में बनाकर लाती हूँ, तब तक तुम टी.वी देखो. उस टाईम आंटी ने वाईट कलर की नाइटी पहन रखी थी और उसमें से सब कुछ नजर आ रहा था.

कुछ देर के बाद आंटी कॉफ़ी बनाकर लाई और मेरे साथ बैठ गयी. अब आंटी ने रिमोट लेकर वही सेक्सी मूवी का चैनल लगा दिया था और वो मूवी देखने लगी थी. मैंने अपना सिर नीचे झुका लिया और कॉफ़ी पीने लगा. तो आंटी बोली कि क्या हुआ? मूवी नहीं देखनी क्या? अब बहुत शरीफ बन रहे हो, तुम आगे पीछे मेरे बदन को ऐसे घूरते हो जैसे अभी खा जाओगे और अब मेरे सामने अपना सिर झुकाकर बैठ गये हो, चलो मूवी देख लो, अब मुझसे किस बात की शर्म है?

अब में भी मूवी देखने लगा था और अब मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया था, जिससे मेरे पजामें में वहाँ से तंबू की तरह तन गया था. आंटी ने धीरे से अपना एक हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया, तो में भी थोड़ा हौसला करके उनके कंधे के ऊपर से घुमाकर अपना बायाँ हाथ आंटी के बूब्स पर ले गया और उसको सहलाने लगा. अब आंटी भी मस्त होने लगी थी और वो मेरे पजामें के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने लगी थी. मैंने अपने दाएँ हाथ से आंटी की नाइटी को ऊपर उठाया और अपना एक हाथ उनकी चूत पर रख दिया.

उन्होंने पेंटी नहीं पहनी थी और उनकी चूत एकदम क्लीन शेव थी. मैंने अपने लिप्स आंटी के लिप्स पर रख दिए और अपनी जीभ आंटी के मुँह में डाल दी और अपनी एक उंगली आंटी की चूत में डाल दी और अपने दूसरे हाथ से उनके बूब्स को दबाने लगा. अब आंटी मस्त होने लगी थी और कहने लगी कि में कब से तेरे लिए बैचेन थी? ओह, सस्स, उउउफफफ्फ राजन कम ऑन.

मैंने आंटी की नाइटी उतार दी और उनकी ब्रा भी उतार दी. अब में उनके बड़े-बड़े बूब्स देखकर पागल हो गया था. अब में उनके बूब्स को अपने दोनों हाथों से दबाने लगा था. अब आंटी का हाथ मेरे लंड पर पजामें के ऊपर से तेज़ी से घूम रहा था. आंटी ने मेरे पजामे का नाड़ा खोल दिया, तो मैंने अपनी अंडरवियर और बनियान भी उतार दी.

अब हम दोनों एकदम नंगे थे और अब आंटी मेरे 7 इंच लंबे और 4 इंच मोटे लंड को देखकर खुश हो गयी थी और बोली कि आज कितने दिनों के बाद में इस खूबसूरत लंड से अपनी प्यास बुझाऊँगी? और यह कहकर आंटी ने मेरे लंड को किस किया और उसको अपने मुँह में लेकर आइसक्रीम की तरह चूसने लगी. अब में अपने एक हाथ से आंटी के बूब्स को दबा रहा था और मेरा दूसरा हाथ उनकी चूत पर था. अब मैंने अपनी 2 उंगलियाँ आंटी की चूत में डाल दी थी. अब आंटी की चूत एकदम गीली हो गयी थी.

हम करीब 40-45 मिनट तक यह सब कुछ करते रहे. उसके बाद में आंटी को गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया. मैंने आंटी की कमर के नीचे एक तकिया रखा और में एक बार आंटी के ऊपर आ गया और उनके लिप्स पर लिप्स रखकर उनके मुँह को चूसने लगा और उनके बूब्स को चूसने लगा. अब मेरा लंड जब आंटी की चूत से टच होता, तो आंटी तिलमिला उठती थी और कहती कि अरे अब तो डाल दो, अब मुझसे और इंतजार नहीं होता. मैंने उनकी दोनों टाँगे अपने कंधे पर रखी और अपने लंड का टोपा उनकी चूत पर रखा और एक ज़ोर से धक्का मारा तो मेरा लंड 4 इंच अंदर चला गया.

आंटी एकदम से चिल्लाई अरे धीरे से दर्द हो रहा है, लेकिन मैंने उनकी बात नहीं सुनी और अब में भी पूरे जोश में था. मैंने दूसरा धक्का लगाया तो मेरा पूरा लंड अंदर जा चुका था. आंटी जोर से चिल्लाई अरे मादरचोद तुझसे कहा ना धीरे डाल.

अब में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा था और मेरे दोनों हाथ आंटी के बूब्स के निपल दबा रहे थे. अब आंटी को मज़ा आने लगा था और अब वो भी नीचे से अपनी कमर उछाल-उछालकर मेरा साथ देने लगी थी और कहने लगी कि और ज़ोर से और ज़ोर से, ज़ोर से चोद मेरी चूत और ज़ोर से चोद, आहह इतना मज़ा मेरी चूत को कभी नहीं आया, मेरे बूब्स को मसल दे, भींच के फाड़ दे इन गुब्बारों को, फाड़ दे मेरी चूत को, आहह मारते जा, मारते जा मेरी चूत को, यह तेरा लंड लेने को बहुत प्यासी हो रही थी, अपनी आंटी को रंडी बना दिया तूने, अब चोद मेरी चूत, मादरचोद चोद. अब में भी जोश में आकर ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड अंदर बाहर करने लगा था.

अब इतने में आंटी एक बार झड़ चुकी थी और अब में भी झड़ने वाला था तो मैंने कहा कि आंटी में झड़ने वाला हूँ, बाहर निकालूँ क्या? तो आंटी बोली कि नहीं मेरे लाल अंदर ही डाल दे, कोई प्रोब्लम नहीं है. मैंने एक ज़ोरदार धक्का लगाया तो में आंटी की चूत के अंदर ही झड़ गया और आंटी के ऊपर गिर गया. अब में आंटी के लिप्स में लिप्स डालकर उनके मुँह को चूसने लगा था.

कुछ देर के बाद हम उठे और उस टाईम 3 बज चुके थे. हमने अपने-अपने कपड़े पहने और में करण के बेडरूम में जाकर सो गया. सुबह जब करण आया तो उसने मुझे उठाया और आंटी ने हमारे लिए चाय बनाई, उस टाईम आंटी के चेहरे पर खुशी साफ-साफ झलक रही थी. हमने चाय पी और में नहाकर वहीं पर तैयार हो गया और करण के कपड़े पहन लिए और करण मुझे स्टेशन तक छोड़ने गया. यह मेरा पहला अनुभव था, मुझे जब भी कोई मौका मिला तो मैनें आंटी की खूब चुदाई की और खूब मजा किया.

The End…

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