दुकानदार की पत्नी की चुदाई – Shopkeeper’s wife fuck story

Dukandar wali ki patni ki chudai

मेरे घर के पास एक दुकान है जिस में घर की ज़रूरत का लगभग सब सामान मिलता है।

मैं रोज उस दुकान में सिगरेट खरीदने के लिए जाता हूँ।

कुछ दिन पहले तक दुकानदार और उसकी पत्नी दुकान चलाते थे। उन दोनों का एक छोटा सा लडका भी है।

दुकानदार की पत्नी का नाम कामिनी है। कामिनी अपने नाम के अनुरूप आकर्षक और कामुक है।

कसा हुआ बदन, किसी को भी लुभाने वाले वक्ष, बड़े-बड़े चूतड़ और चौडी जाँघें। चुदाई के लिए ललचाने वाली इन सभी विशेषताओं से भरपूर स्त्री।

मुझे बड़े चूतड़ और चौडी जाँघों वाली औरतें खूब पसंद है क्योंकि ऐसी औरतें चौडी जाँघें होने के कारण मोटे लंड सह भी सकती हैं और लेना भी चाहती हैं। इसी तरह बड़े चूतड़ होने के कारण लंड का धक्का भी ज़ोर से सह लेती हैं।

मेरा लंड बड़ा तो नहीं है पर छोटा भी नहीं है। लेकिन मोटाई में किसी से कम भी नहीं। इसलिए चौडी जाँघें और बड़े चूतड़ वाली औरतें मेरे लौड़े को खूब पसंद करती हैं।

यही एक कारण है कि मेरे एक दोस्त की बीबी ने पहली बार तो मुझसे चुदने में आनाकानी की थी लेकिन एक बार चुदवाने के बाद अब खुद बुलाकर मुझसे अपनी चूत चुदवाती है।

कामिनी को मैंने जबसे देखा था तब से उसकी चूत चखने की मेरी तमन्ना थी लेकिन मौका नहीं मिल रहा था।

किस्मत से कुछ दिनों के बाद कामिनी का पति दुबई चला गया। मुझे इससे बेहद खुशी हुई और कामिनी की बूर का मजा लेने की आशा और भी बलवान हो गई।

अब मैं सिगरेट खरीद कर तुरंत दुकान से निकलने की वजाए वहीं रुककर उसे पीने लगा। इससे कामिनी से दो-चार बातें भी हो जाती थीं और उसके उभरे हुए चूचकों के दर्शन भी।

करीब तीन महीने ऐसे ही गुजर गए। कामिनी की बातों से ऐसा नहीं लगता था कि उसके पति के जाने के बाद उसे दूसरे मर्द की जरुरत महसूस होने लगी हो। लगता था कि उसके पति ने जाने से पहले चोद-चोद कर कामिनी की चूत को फाड के रख दिया है और उसे अब लंड की जरुरत महसूस नहीं हो रही।

लेकिन मेरा अनुभव कह रहा था कि ऐसी कामुक औरत अब ज़्यादा दिन लंड लिए बिना नहीं रह सकती। कुछ दिन बाद ही मेरा अनुमान सही लगने लगा।

अब कामिनी मुझसे ज्यादा बात करने लगी थी। धीरे-धीरे उसका पल्लु नीचे सरकने लगा था। पल्लु नीचे सरकने के बाद वो थोड़ी देर रुक कर उसे उठा लेती थी। इससे मुझे कामिनी के चूचकों के ऊपरी भाग के दर्शन भी होने लगे थे।

मैं बातें भी करता और चूचक भी देखता। कभी एक चौथाइ तो कभी आधे।

एक छुट्टी के दिन सुबह जब मैं सिगरेट खरीदने गया तो कामिनी ने कहा – आपसे कुछ सलाह करना है। मैं कुछ समझा नहीं कि मुझसे क्या सलाह करना है।

मैंने कहा – कहो, क्या बात है?

उसने कहा – यहाँ अच्छा नहीं रहेगा।

कामिनी ने कहा अगर मैं आज आफिस जाऊँ तो वह भी जाना चाहेगी। ना जाने क्यों मुझे विश्वास हो गया कि कामिनी को मेरी सेवा की जरुरत है। कामिनी मुझे अपनी चूत चखने के लिए निमंत्रण दे रही है।

मैंने हाँ कर दिया और बोला कि आफिस जाते समय पिकअप कर लूंगा। इस पर कामिनी ने कहा कि यहाँ कोई देखेगा तो कुछ अलग सोच लेगा इसलिए जाते समय थोड़ा आगे जाकर रुकूँ और वो वहीं आ जायगी।

मैंने कहा – ठीक है।

करीब १ बजे मैं घर से निकला और कामिनी की दुकान से थोड़ा आगे जाकर उसकी प्रतीक्षा करने लगा। कामिनी थोड़ी ही देर में आ गई। काली जीन्स और सफेद शर्ट में। कामिनी ने काली ब्रा से अपनी चूचियाँ कसकर बांध रखी थी।

टाइट सफेद शर्ट में काली ब्रा अच्छी तरह दिखाई दे रही थी। इससे उसकी चूचियों के साइज़ का अंदाज़ लगाने में मुझे दिक्कत नहीं हुई। उसका साइज करीब ३७ होगा।

मैंने कामिनी को आगे की सीट पर बैठाया और आफिस के लिए रवाना हो गया।

छुट्टी के कारण आज मैं अकेला था। मैंने अपने रूम में पहुंचकर कामिनी को सीट पर बैठाया और मैं भी उसी के पास बैठ गया।

कामिनी ने अपने पर्स से एक पैकेट सिगरेट निकाली। मैंने आश्चर्य चकित होकर पूछा – तुम सिगरेट पीती हो?

कामिनी ने कहा – नहीं, ये सिगरेट तो आपके लिए है। उसने कहा कि उसे सिगरेट पीता मर्द अच्छा लगता है।

मैंने सिगरेट जलाई और उसके पति के बारे में कामिनी से बातें करने लगा। बातचीत के दौरान हम और पास हो गए थे।

मैंने देखा कि कामिनी को मेरे उससे चिपकने से कोई दिक्कत नहीं हुई। थोड़ी शरमाई जरुर थी लेकिन वह अपने को दूर नहीं कर रही थी।

मैं समझ गया कि कामिनी को कोई राय-सलाह नहीं करनी थी। उसे तो अपनी रसीली चूत का रसपान कराना था और अपनी प्यासी बूर की प्यास बुझाना था।

बात आगे बढाने के लिए मैंने उसकी कान में कहा – तुम बहुत सुन्दर और कामुक हो। उसने कुछ जवाव नहीं दिया। लेकिन उसकी शर्माहट बता रही थी कि वह अपनी जवानी लुटाने के लिए तैयार है।

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अब देर करना मुनासिब नहीं था। मैंने उसके गाल में एक चुम्मा लेकर उसे दबोच लिया।

कामिनी मेरे आगोश में आसानी से आ गई और मैं उसके होंठ चूसने लगा। मैंने उसे भींचकर अपनी पूरी ताक़त से पकड़ रखा था।

धीरे-धीरे उसने भी मुझे अपनी बाहों में भींच लिया। हम दोनों ने काफ़ी देर एक-दूसरे के होंठ चूसकर मजा लिया।

लेकिन मेरी नजर तो उसकी चूचियों पर थी। मेरे हाथ उन चूचियों को मसलने के लिए मचल रहे थे। इसलिए मैंने उसे थोडा अलग कर कर चूचियों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया।

थोड़ी ही देर में मैंने उसकी शर्ट का बटन खोल दिया।

कामिनी शरमा तो रही थी लेकिन अवरोध भी नहीं कर रही थी।

थोड़ी ही देर में मैंने उसकी शर्ट का बटन खोल दिया।

कामिनी शरमा तो रही थी लेकिन अवरोध भी नहीं कर रही थी।

अब मैंने उसकी शर्ट निकाल दी।

कुछ ही देर में कामिनी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।

उफ़!! काली ब्रा में बहुत ही अच्छी लग रही थी वो।

मैंने उसकी कमर के उपरी भागों पर अपना हाथ चलाया और नाभि में उंगली डाल कर नाभि को चूसने लगा।

उसकी सिसकारियों से पता चल रहा था कि उसको खूब मजा आ रहा था।

मैंने देखा कि कामिनी अब अपने आप अपने दोनों हाथों से अपनी चूचियाँ सहला रही थी। शायद उसकी चूचियाँ मसलवाने के लिए मचल रही थीं और तंग ब्रा के भीतर कुनमुना रही थीं।

मैंने कामिनी की ब्रा का हुक खोलकर उसकी चूचियों को आजाद कर दिया। उसकी नंगी चूचियाँ अब मेरे सामने थीं।

गोल-गोल और मेरी कल्पना से बहुत ज़्यादा अच्छी। ज़रा सोचिए गौर वर्ण और गुलाबी निप्पल। अभी तक उसकी चूचियाँ एकदम कसी हुई और सुडोल थीं।

मुझे बाद में पता चला कि उसका पति चूची ढीली होने के डर से ज्यादा मसलता और चूसता नहीं था।

ना जाने कितनी देर मैं उसकी चूचियों को निहारता रहा।

कामिनी को ब्रा उतरवाते समय बहुत शरम आ रही थी इसलिए उसने अपनी आँखें बंद कर ली थीं।

जब उसे लगा कि मैं कुछ कर नहीं रहा हूँ तो उसने धीरे से आँखें खोलीं और मुझे अपनी चूचियाँ निहारते देख कर शरमा गयी।

उसने कहा – इसे क्यों घूर रहे हो? और अपनी चूचियाँ छुपाने के लिए मुझे पकडकर अपनी बाहों में भींच लिया।

उसकी दोनों नरम-नरम चूचियाँ मेरी छाती में दब गयी थीं।

मैंने उसे थोडा सा अलग किया और दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियाँ जोर से मसलते हुए कहा – ये तो देखने और मसलने के लिए ही हैं मेरी रानी और उसकी चूचियाँ जोर-जोर से मसलने लगा।

अब उसकी काम वासना बढने लगी थी उसके दोनों निप्पल बेहद कड़क होकर खड़े हो गये थे।

मैंने दोनों निप्पल को चुटकी से मसलना शुरु किया।

कामिनी सिसकारियाँ ले रही थी और मैं बस चूची और निप्पल बेतहाशा मसले जा रहा था।

कुछ देर बाद मैंने एक हाथ से उसकी चूचियाँ मसलते हुए दूसरे हाथ से उसकी जीन्स का बटन खोलकर उसे नीचे सरका दिया।

क्या बताऊँ मैं तो उसकी गांड ओर चूचियों का दिवाना था। किस्मत से इस वक़्त मेरे पास दोनों थे। मैं उसकी चूची और गांड दबाने लगा। अब कामिनी मदहोश होने लगी थी।

अचानक मैंने महसूस किया कि उसके हाथ मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरा खडा लंड सहला रहे थे।

अब मैंने अपना पैंट और शर्ट निकाल दिया। मैं अब सिर्फ अंडरवियर पहना था और कामिनी सिर्फ पैंटी।

मैं उसकी चूचियाँ मसलते हुए उसके होंठ चूसने लगा।

पता नही कब कामिनी ने मेरे अंडरवियर में हाथ घुसाकर मेरा लौडा पकड़कर दबाना शुरु कर दिया था।

मैं तो कामिनी की चूची का दिवाना था। उसकी दाईं चूची मसलता रहा और बाईं चूची को चूसने लगा।

मुझे चूची चूसने में मजा आ रहा था और उसे मेरा लौडा दबाने में। फिर मैं उसकी बाईं चूची मसलने लगा और दाईं चूची को चूसने लगा।

कामिनी की मदहोशी बढ़ती जा रही थी अब वो मेरे लंड को और जोर से दबाने लगी। उसकी चूत में तो जैसे आग लग गई थी।

वो खुद ही अपने एक हाथ से अपनी चूत दबाने लगी और दूसरे हाथ से मेरा लंड।

मैं समझ गया कि अब कामिनी की चूत लौडा लेने के लिए बेकाबू हो गयी है। पर क्या करूँ? मुझ उसे तरसाने में मजा आ रहा था।

मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फेरते हुए दोनों जाँघों के बीच में हाथ डाल दिया।

खुद की चूत दबाने से उसकी पैंटी भीग गई थी।

मैंने उसकी पैंटी निकाल फेंकी और चूत में उंगली डालकर चलाने लगा। कामिनी अब तक पूरी तरह मदहोश हो गई थी।

उसने बोला – अब नहीं रहा जा रहा है भैया।

मैंने उसके कान में धीरे से कहा – भैया, मत बोल रानी, सैंया बोल।

उसने फ़ौरन कहा – अब नहीं रहा जा रहा है मेरे सैंया। जो करना है जल्दी करो मेरे राजा, अब चोद भी दो।

अब देर करना कामिनी की जलती चूत के साथ नाइंसाफी थी।

मैंने बिना देर किए कामिनी की गांड सोफे की बांह पर टिका कर उसे सोफे पर लिटा दिया और उसकी पैंटी निकाल फेंकी।

जब देखा तो उसकी बूर के पानी से झांट के बाल तक भीगे हुए थे। उसकी चूत उसी के रस से सनी हुई थी।

इतनी गीली चूत में लंड बिल्कुल आसानी से चला जाता और चुदाई का मजा न मुझे आता ना कामिनी को।

तो मैंने उसकी पैंटी से ही उसकी चूत भीतर तक पोंछ कर साफ कर दी उसके बाद मैं अपना अंडरवियर निकाल फेका और अपना औजार उसकी चूत पर रखा।

अब मैने कामिनी की दोनों टाँगों को ऊपर किया और उसकी तरफ मोडते हुए अपना लंड उसकी चूत में घुसाने लगा।

जैसे-जैसे मेरा लंड भीतर जा रहा था वैसे-वैसे कामिनी की कराह बढने लगी और आह आह करते-करते उईईई मां करने लगी।

उसका दर्द देखकर मुझे और मजा आ रहा था। मैंने जोर-जोर से धक्का देना शुरु किया। कामिनी अब दर्द से चीख रही थी।

कुछ ही देर करने के बाद कामिनी भी अभ्यस्त हो गई और उसे मजा आने लगा।

अब वह अपनी गांड उचका-उचका कर प्रतिक्रिया देने लगी। मैं ऊपर से धक्का देता और वह नीचे से।

मेरा लंड अंदर-बाहर हो कर उसकी बच्चेदानी को ठोंक रहा था।

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कामिनी बहुत दिन बाद लंड ले रही थी और बहुत जोश में थी इसलिए करीब पांच मिनिट में झड़ गई।

मेरा लंड अपना काम कर ही रहा था। वो करह रही थी आह.. आह.. आह.. चोद.. और ज़ोर से चोद ना.. फाड़ डाल..

कुछ देर से बाद कामिनी निढाल हो गयी तो मैंने उसकी चूत में लंड की रफ्तार बढा दी और अपना सारा वीर्य उसकी बूर के अंदर डाल दिया।

कामिनी की चूत लबालब भर गई।

मैंने अपना लंड निकालकर कामिनी को चूमा और उठाया।

थोड़ी देर सोफे पर बैठकर हमने एक-दूसरे को प्यार किया।

मैंने उसके कान में कहा कि अभी मन नहीं भरा है। इस पर कामिनी बोली – आपका लंड और चोदने का तरीका इतना अच्छा है कि मन तो भर ही नहीं सकता। लेकिन अब देर हो जाएगी।

फिर कामिनी ने मेरे अंडरवियर से अपनी चूत साफ की और कपड़े पहनने लगी।

फिर हम दोनों कपड़े पहनकर निकल गये।

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